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निषेचन

ID: ANH12063hin
MEDICAL ANIMATION TRANSCRIPT: फर्टिलाइज़ेशन निषेचन एक शुक्राणु की अविश्वसनीय बाधाओं का सामना करके, अंडे से जुड़ने की और एक नए मानवजीवन को जन्म देने की वीरता की कहानी है। यह हम सभी की कहानी है। संभोग के दौरान लगभग 300 मिलियन शुक्राणु योनि में प्रवेश करते हैं। इसके तुरंत बाद उनमें से लाखों शुक्राणु या तो योनी से बाहर निकल जाएंगे या उसके अम्लीय वातावरण में मर जाएंगे। हालांकि, कई शुक्राणु उनके चारों ओर तरल पदार्थ में प्रदान किए गए सुरक्षात्मक तत्वों के कारण जीवित रहते हैं। उसके बाद शुक्राणुओं को सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा जो कि गर्भाशय में प्रवेश करने के लिए उसका मुख है, उसमें से गुजरना आवश्यक है। आमतौर पर यह कसकर बंद रहता है, लेकिन यह सर्विक्स कुछ दिनों के लिए खुला रहता है। जब महिला ओव्यूलेट यानी अंडोत्सर्ग करती है। शुक्राणु सरवाइकल म्यूकस यानी ग्रीवा बलगम जो कि पानी की तरह पतला हो जाता है, ताकि शुक्राणु उसमें से अधिक आसानी से गुजर सके, उसके माध्यम से तैरकर आगे जाता है। एक बार सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा के अंदर पहुंचने के बाद शुक्राणु गर्भाशय की ओर तैरना चालू रखता है। यद्यपि इस बलगम से गुजरने के प्रयास में लाखों शुक्राणु मर जाते है, लेकिन कुछ शुक्राणु गर्भाशय की परतों में फंस जाते हैं और पीछे रह जाते हैं। लेकिन बाद में वे पहले समूह के बाद बैकअप के रूप में यात्रा को जारी रख सकते हैं। गर्भाशय के अंदर गर्भाशय की मांसपेशियों से संबंधित संकुचन शुक्राणुओं को उनकी यात्रा करने में मदद करते हैं। हालांकि महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली की निवासी कोशिकाएं शुक्राणु को गलती से विदेशी आक्रमणकारी समझकर हजारों से अधिक को नष्ट कर देती है। उसके बाद आधे शुक्राणु खाली फैलोपियन ट्यूब की ओर जाते हैं, जबकि दूसरे आधे शुक्राणु निषेचित नहीं हुए हो, वैसे अंडे वाली फैलोपियन ट्यूब की ओर जाते हैं। जब केवल कुछ हजार शुक्राणु ही बाकी रह जाते हैं। फैलोपियन ट्यूब के अंदर छोटी सेलिया अंडे को गर्भाशय की ओर धकेलती है। शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने के लिए इस गति के खिलाफ आगे बढ़ना होता है। कुछ शुक्राणु सिलिया में फंस जाते हैं और मर जाते हैं। यात्रा के इस हिस्से के दौरान प्रजनन पथ में मौजूद रसायन शुक्राणुओं के शीर्ष का आवरण करनेवाली सिलिया में परिवर्तन आने का कारण बनते हैं। नतीजतन शुक्राणु अत्यंत अनुभूत हो जाते हैं, जिससे वे अपने अंतिम मुकाम तक अधिक वेग से और तेजी से तैरते हैं। आखिरकार शुक्राणु अंडे तक पहुँचते हैं। मूल 300 मिलियन शुक्राणुओं में से केवल कुछ दर्जन ही शेष रहते हैं। कोरोना रेडिएटा नामक कोशिकाओं की एक परत अंडे को कवर करती है। अंडे की बाहरी परत ज़ोना पेल्यूसिडा तक पहुँचने के लिए शुक्राणु को अंडे की इस परत से गुजरना आवश्यक है। जब शुक्राणु ज़ोना पेल्यूसिडा तक पहुँचते हैं तो वे उस सतह पर स्थित विशिष्ट शुक्राणु रिसेप्टर से जुड़ जाते हैं। ज़ोन के एक्रोसोम्स को पाचक एंजाइम्स जारी करने के लिए प्रेरित करता है, जो शुक्राणु को उस परत में प्रवेश करने में सक्षम बनाते हैं। ज़ोना पेल्यूसिडा के अंदर अंडे की कोशिकाओं की झिल्ली के बाहर एक संकीर्ण तरल पदार्थ से भरा स्थान होता है। अंडे के संपर्क में आने वाला पहला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है। अविश्वसनीय बाधाओं के खिलाफ एक खतरनाक यात्रा के बाद, एक सकल शुक्राणु अंडे की कोशिका की झिल्ली से जुड़ जाता है। कुछ ही मिनटों में बाहरी झिल्ली पिघल जाती है और अंडा शुक्राणु को अंदर खींच लेता है। इस घटना के कारण अंडे की झिल्ली में परिवर्तन होता है जो अन्य शुक्राणुओं को उससे संलग्न होने से रोकता है। उसके बाद अंडा ऐसे रसायनों को जारी करता है जो अन्य शुक्राणुओं को अंडे से दूर तक धकेलते हैं। और निषेचन के लिए एक अभेद्य झिल्ली बनाते हैं। जैसे जैसे यह प्रतिक्रिया बाहर की ओर फैलती है, ज़ोना पेल्यूसिडा सख्त हो जाता है, जिसके कारण कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण शुक्राणु उसमें फंस जाता है और अंदर पकड़ा जाता है। अंडे के कारण शुक्राणु अब ज़ोना पेल्यूसिडा से छूटने में सक्षम नहीं रहते हैं। इस बीच अंडे के अंदर कसकर पैक किया गया पुरुष आनुवंशिक पदार्थ बाहर निकलता है और फैलता है। इस आनुवंशिक पदार्थ के चारों ओर एक नई झिल्ली बनती है जिसके कारण पुरुष प्रो-न्यूक्लियस बनता है। इसके भीतर आनुवंशिक पदार्थ 23 गुणसूत्रों में बदलता है। शुक्राणुओं के अंडे के साथ मिश्रित हो जाने के कारण जागृत हुआ महिला आनुवंशिक पदार्थ विभाजित होना पूरा करती है, जिसके परिणामस्वरूप महिला प्रो न्यूक्लियस बनता है, जिसमें भी 23 गुणसूत्र होते हैं। जब नर और मादा प्रो-न्यूक्लियाई बनते हैं, तो मकड़ी जैसे रेशे जिन्हें माइक्रो ट्यूब्युलस यानी सूक्ष्म नलिकाएँ कहा जाता है, वे उन्हें एक दूसरे की ओर खींचती है। गुणसूत्रों के दो सेट एक दूसरे से जुड़ते हैं, जो निषेचन की प्रक्रिया को पूरा करते है। इस समय एक अद्वितीय आनुवंशिक कोड उभरता है, जो तुरंत ही बच्चे के लिंग, उसके बालों के रंग, उसकी आंखों के रंग और सैकड़ों अन्य विशेषताओं को निर्धारित करता है। यह एक नयी अकल कोशिका, एक नए मानव की शुरुआत है और अब फैलोपियन ट्यूब में मौजूद सिलिया धीरे धीरे, ज़ाइगोट को गर्भाशय की ओर धकेलती है, जहां वो गर्भाशय की समृद्ध परत में प्रत्यारोपित होता है। जहां वो अगले नौ महीनों तक विकसित होता है और परिपक्व होता है। जब तक कि वो जन्म के लिए तैयार न हो जाए।

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